ब्राह्मण अपने वेद के आङ्गिरस श्रुति (दुष्ट मन्त्रों) को बिना विचारे ही (शीघ्र ही, शत्रु पर) प्रयोग करे; क्योंकि ब्राह्मण का (अभिचारमन्त्रोच्चारणरूप) वचन ही शस्त्र है, अतएव उस (वचनरूपी शस्त्र) से ब्राह्मण शत्रुओं को नष्ट करे (राजा के यहाँ उसके अपराध को कहकर दण्डित न करावे, किन्तु अभिचार प्रयोग से उसे स्वयं दण्डित करे)।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।