(ब्राह्मण के लिए) अपने (ब्राह्मण के) पराक्रम तथा राजा के पराक्रम से अपना (ब्राह्मण का) पराक्रम ही अधिक बलवान् है, अतएव ब्राह्मण अपने पराक्रम से ही शत्रुओं का निग्रह करे।
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