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मनुस्मृति • अध्याय 11 • श्लोक 31
स्ववीर्याद्राजवीर्याच्च स्ववीर्य बलवत्तरम्‌ । तस्मात्स्वेनैव वीर्येण निगृह्णीयादरीन्द्रिजः ।।
(ब्राह्मण के लिए) अपने (ब्राह्मण के) पराक्रम तथा राजा के पराक्रम से अपना (ब्राह्मण का) पराक्रम ही अधिक बलवान्‌ है, अतएव ब्राह्मण अपने पराक्रम से ही शत्रुओं का निग्रह करे।
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