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मनुस्मृति • अध्याय 11 • श्लोक 30
न ब्राह्मणो वेदयेत किञ्चिद्राजनि धर्मवित्‌ । स्ववीर्येणैव तान्‌ शिष्यान्मानवानपकारिणः ।।
धर्मज्ञाता ब्राह्मण किसी के किसी अपराध को राजा से न कहे (किसी पर राजा के यहाँ मुकदमा न करे), किन्तु उन अपराधी मनुष्यों को अपने पराक्रम (आगे कही जाने वाली शक्ति) से दण्डित करे।
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