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मनुस्मृति • अध्याय 11 • श्लोक 3
एतेभ्यो हि द्विजाग्र्येभ्यो देयमन्नं सदक्षिणम्‌ । इतरेभ्यो बहिबेंदिकृतान्नं देयमुच्यते ।।
इन नव (११।१) ब्राह्मणस्नातकों के लिए वेदी (चौके) के भीतर सिद्ध (पक्व--पका हुआ) अन्न देना चाहिये तथा अन्य वर्ण वालों के लिए वेदी के बाहर सिद्धान्न देना चाहिए।
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