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मनुस्मृति • अध्याय 11 • श्लोक 264
आद्यं यत्यक्षरं ब्रह्म त्रयी यस्मिन्प्रतिष्ठिता । स गुह्यो5न्यख्रिवृद्देदो यस्तं वेद स वेदवित्‌ ।।
सब वेदों का आदि सारभूत जो तीन अक्षरों (अकार उकार तथा मकार) वाला ब्रह्म (प्रणव अर्थात्‌ ॐ) है और जिसमें त्रयी (ऋग्ग्वेद, यजुर्वेद तथा सामवेद) प्रतिष्ठित है, वही दूसरा त्रिवृत्‌ वेद अर्थात्‌ प्रणव 'ॐ' गोपनीय है; जो उसको (स्वरूप तथा अर्थ से) जानता है, वही वेदज्ञाता है।
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