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मनुस्मृति • अध्याय 11 • श्लोक 263
ऋचो यजूंषि चाद्यानि सामानि विविधानि च । एष ज्ञेयस्तरवृद्देदो यो वेदैनं स वेदवित्‌ ।।
ऋग्वेद के मन्त्र; यजुर्वेद के मन्त्र और (बृहद्रथन्तर आदि) अनेकविध सामवेद; इन तीनों के पृथक्‌-पृथक्‌ मन्त्र तथा ब्राह्मण भागरूप 'त्रिवृतू' वेद को जानना चाहिए, जो इसे जानता है, वही वेदज्ञाता है।
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