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मनुस्मृति • अध्याय 11 • श्लोक 261
ऋक्संहितां त्रिर भ्यस्य यजुषां वा समाहितः । साम्नां वा सरहस्यानां सर्वपापैः प्रमुच्यते ।।
मन्त्र-ब्राह्मणात्मक (ब्राह्मण-सहित मन्त्रभाग को, केवल मन्त्रभाग को ही नहीं) ऋग्वेद को, अथवा (मन्त्र-ब्राह्मणसहित) यजुर्वेद को, अथवा ब्राह्मणोपनिषद्‌ के सहित समाहितचित्त होकर तीन बार अभ्यास (पाठ) करके सब पापों से छूट जाता है।
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