ऋक्संहितां त्रिर भ्यस्य यजुषां वा समाहितः ।
साम्नां वा सरहस्यानां सर्वपापैः प्रमुच्यते ।।
मन्त्र-ब्राह्मणात्मक (ब्राह्मण-सहित मन्त्रभाग को, केवल मन्त्रभाग को ही नहीं) ऋग्वेद को, अथवा (मन्त्र-ब्राह्मणसहित) यजुर्वेद को, अथवा ब्राह्मणोपनिषद् के सहित समाहितचित्त होकर तीन बार अभ्यास (पाठ) करके सब पापों से छूट जाता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।