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मनुस्मृति • अध्याय 11 • श्लोक 259
यथाश्वमेधः क्रतुराट्‌ सर्वपापापनोदनः । तथाऽघमर्षणं सूक्तं सर्वपापापनोदनम्‌ ।।
जिस प्रकार सब यज्ञों का राजा अश्वमेध यज्ञ सब पापों को नष्ट करने वाला है, उसी प्रकार अघमर्षण सूक्त ('ऋतं च सत्यं च' यह मन्त्र) सब पापों को नष्ट करनेवाला है।
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