तीन दिन तक उपवास तथा त्रिकाल (प्रायः, मध्याह्न तथा सायंकाल) स्नान करता हुआ और जल में डूब (गोता लगा) कर ही “अघमर्षण” (ऋतञ्च सत्यं च) इस सूक्त का तीन बार जपकर मनुष्य सब पापों से छूट जाता है।
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