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मनुस्मृति • अध्याय 11 • श्लोक 258
त्र्यहं तूपवसेद्युक्तस्त्रिरह्नोऽ भ्युपयन्नपः । मुच्यते पातकैः सर्वैस्त्रर्जपित्वाऽ घमर्षणम्‌ ।।
तीन दिन तक उपवास तथा त्रिकाल (प्रायः, मध्याह्न तथा सायंकाल) स्नान करता हुआ और जल में डूब (गोता लगा) कर ही “अघमर्षण” (ऋतञ्च सत्यं च) इस सूक्त का तीन बार जपकर मनुष्य सब पापों से छूट जाता है।
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