अथवा तीन 'पराक' कृच्छुत्रत (११।२१४) से शुद्ध होकर वन में (मन्त्र-ब्राह्मणरूप) वेदसंहिता का तीन बार अभ्यास (पाठ) कर बाह्य (शारीरिक) तथा आभ्यन्तर (मानसिक) शुद्धियुक्त मनुष्य सब महापातकों से मुक्त हो जाता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।