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मनुस्मृति • अध्याय 11 • श्लोक 255
मन्त्रैः शाकलहोमीयैरब्दं हुत्वा घृतं द्विजः । सुगुर्वप्यपहंत्येनो जप्त्वा वा नम इत्यूचम्‌ ।।
द्विज ('देवकृतस्य' इत्यादि) शाकल होममन्त्रों से एक वर्ष तक प्रतिदिन घी का हवन कर अथवा 'नम:' (नम इन्द्रश्र) इस ऋचा को एक वर्ष तक जपकर बड़े पाप को भी नष्ट कर देता है।
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