द्विज ('देवकृतस्य' इत्यादि) शाकल होममन्त्रों से एक वर्ष तक प्रतिदिन घी का हवन कर अथवा 'नम:' (नम इन्द्रश्र) इस ऋचा को एक वर्ष तक जपकर बड़े पाप को भी नष्ट कर देता है।
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