मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
मनुस्मृति • अध्याय 11 • श्लोक 253
सोमादौद्र तु बह्वेनाः समामभ्यस्य शुध्यति । स्रवन्त्यामाचरन्स्नानमर्यम्णामिति च तृचम्‌ ।।
बहुत पापों को करने वाला मनुष्य 'सोमारोद्र' (सोमारुद्रा धारयेथामसूर्यम्‌) इन चार ऋचाओं को, “अर्यमणम्‌” (अर्यमणं वरुणं मित्रं च) इन तीन ऋचाओं को नदी में स्नानकर (एक मास तक प्रत्येक का जपकर) शुद्ध हो जाता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें