सोमादौद्र तु बह्वेनाः समामभ्यस्य शुध्यति ।
स्रवन्त्यामाचरन्स्नानमर्यम्णामिति च तृचम् ।।
बहुत पापों को करने वाला मनुष्य 'सोमारोद्र' (सोमारुद्रा धारयेथामसूर्यम्) इन चार ऋचाओं को, “अर्यमणम्” (अर्यमणं वरुणं मित्रं च) इन तीन ऋचाओं को नदी में स्नानकर (एक मास तक प्रत्येक का जपकर) शुद्ध हो जाता है।
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