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मनुस्मृति • अध्याय 11 • श्लोक 251
एनसां स्थूलसूक्ष्माणां चिकीर्षन्नपनोदनम्‌ । अवेत्यूचं जपेदब्दं यत्किञ्चेदमितीति वा ।।
स्थूल (ब्रह्महत्यादि महापातक--११।५३) तथा सूक्ष्म गौहत्यादि उपपातक--११।५८-६५) पापों की शुद्धि चाहनेवाला मनुष्य 'अव' ते हेलो वरुण नमोभिः? इस ऋचा को या 'यत्किज्ञेद' “यत्किञ्चेदं वरुण देव्यै जने' इस ऋचा को या इति “इति वा इति मे मनः” इस सूक्त को एक वर्ष तक प्रतिदिन १-१ बार जपे।
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