देवस्वं ब्राह्मणस्वं वा लोभेनोपहिनस्ति यः ।
स पापात्मा परे लोके गृध्रोच्छिष्टेन जीवति ।।
जो मनुष्य लोभ से देवता (मठ, मन्दिर आदि) के तथा ब्राह्मण के धन को लेता है, वह पापी (मरकर) परलोक में गीध का जूठा खाकर जीता है।
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