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मनुस्मृति • अध्याय 11 • श्लोक 247
सव्याहतिप्रणवकाः प्राणायामास्तु षोडश । अपि भ्रूणहणं मासात्पुनंत्यहरहः कृताः ।।
व्याहति तथा प्रणव (ओंकार) से युक्त सोलह प्राणायाम प्रतिदिन एक मास तक करने से ब्रह्मघाती को भी ('अपि' शब्द से आदिदेशिक ब्रह्महत्या के प्रायश्चित्त के अधिकारी को भी) शुद्ध कर देते हैं।
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