मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
मनुस्मृति • अध्याय 11 • श्लोक 246
इत्येतदेनसामुक्तं प्रायश्षित्तं यथाविधि । अत ऊर्ध्व रहस्यानां प्रायश्चित्तं निबोधत ।।
(भृगुजी महर्षियों से कहते हैं कि - ब्रह्महत्या आदि) पापों का यह (११।७१-२४५) प्रायश्चित्त विधिपूर्वक (मैंने) कहा, यहाँ से आगे (११।२४७-२६४) रहस्यों (गुप्त पापों) के प्रायश्चित्त को (आप लोग) सुनें।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें