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मनुस्मृति • अध्याय 11 • श्लोक 245
यथैधस्तेजसा वह्निः प्राप्तं निर्दहति क्षणात्‌ । तथा ज्ञानाग्निना पापं सर्व दहति वेदवित्‌ ।।
जिस प्रकार अग्नि अपने तेज (दाहकर शक्ति) से काष्ठादि समीपवर्ती पदार्थो को तत्काल जला देती है, उसी प्रकार वेदज्ञाता ब्राह्मण अपने ज्ञानरूप अग्नि से सभी पापों को नष्ट कर देता है।
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