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मनुस्मृति • अध्याय 11 • श्लोक 244
वेदाभ्यासोऽन्वहं शक्त्या महायज्ञक्रियाक्षमा । नाशयन्त्याशु पापानि महापातकजान्यपि ।।
प्रतिदिन यथाशक्ति वेद का अभ्यास, पञ्चमहायज्ञ (३।७०) तथा क्षमा; ये सब महापातक से भी उत्पन्न पापों को नष्ट कर देते हैं (फिर साधारण पापों के विषय में क्या कहना है,) अत: इनका आचरण यथाशक्ति करते रहना चाहिये।
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