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मनुस्मृति • अध्याय 11 • श्लोक 243
यदेतत्तपसो देवा महाभाग्यं प्रचक्षते । सर्वस्यास्य प्रपश्यन्तस्तपसः पुण्यमुद्भवम्‌ ।।
इन समस्त प्राणियो के दुर्लभ एवं पुण्यमय जन्म को प्राप्त होता हुआ देखकर देवता लोग तप के बड़े भारी माहात्म्य को कहते हैं।
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