तपसैव विशुद्धस्य ब्राह्मणस्य दिवौकसः ।
इज्याश्च प्रतिगृह्णन्ति कामान्संवर्धयन्ति च ।।
तप से ही अन्यतम शुद्ध ब्राह्मण के यज्ञ में देवता लोग हविष्य को लेते और उनके मरोरथ को पूर्ण करते हैं।
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