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मनुस्मृति • अध्याय 11 • श्लोक 240
यत्किञ्चिदेनः कुर्वन्ति मनोवाक्कर्मभिर्जनाः । तत्सर्व निर्दहन्त्याशु तपसैव तपोधनाः ।।
मनुष्य मन, वचन तथा काय से जो कुछ पाप करता है, उन सब पापों को वे तपस्वी लोग तप से ही भस्म कर देते हैं।
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