यज्ञार्थमर्थं भिक्षित्वा यो न सर्व प्रयच्छति ।
स याति भासतां विप्रः काकतां वा शतं समाः ।।
जो मनुष्य यज्ञ के लिए धन माँगकर सब धन को दान नहीं कर देता है वह (मरकर) सौ वर्षों तक भास या कोए का जन्म पाता है।
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