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मनुस्मृति • अध्याय 11 • श्लोक 239
कीटाश्चाहिपतङ्गाश्च पशवश्च वयांसि च। स्थावराणि च भूतानि दिवं यान्ति तपोबलात्‌ ।।
कीट (क्षुद्र जीव), सर्प, पतङ्ग (फुनङ्गे-उड़ने वाले फतिङ्गे), पशु, पक्ष तथा सम्पूर्ण चराचर (वृक्ष, लता, गुल्म आदि) जीव तप के बल से ही स्वर्ग जाते हैं।
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