इस कारण (११।२३३-२३७) महापातकी (ब्रह्महत्या आदि करनेवाले ११।५३) तथा शेष अकार्यकारी (गोहत्या आदि उपपातक करनेवाले ११।५८-६५) अच्छी तरह किये गये तप के द्वारा ही पाप से छूट जाते हैं।
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