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मनुस्मृति • अध्याय 11 • श्लोक 236
औषधान्यगदा विद्या दैवी च विविधा स्थितिः । तपसैव प्रसिद्ध्यन्ति तपस्तेषां हि साधनम्‌ ।।
औषध, नीरोगता, (वेदादि ज्ञानरूप) विद्या, देवों की (स्वर्ग आदि) अनेक लोकों में स्थिति, ये सब तप से ही प्राप्त होते हैं, अतएव तप ही इनकी प्राप्ति का कारण है।
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