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मनुस्मृति • अध्याय 11 • श्लोक 235
ऋषयः संयतात्मानः फलमूलानिलाशनाः । तपसैव प्रपश्यन्ति त्रैलोक्यं सचराचरम्‌ ।।
(काय, वचन और मन से) संयम रखने वाले तथा फल-मूल एवं वायु का भक्षण करने वाले महर्षि लोग तप से ही चराचरसहित त्रैलोक्य देखते हैं।
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