मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
मनुस्मृति • अध्याय 11 • श्लोक 230
एवं सञ्चिन्त्य मनसा प्रेत्य कर्मफलोदयम्‌ । मनोवाङ्मूर्तिभिर्नित्यं शुभं कर्म समाचरेत्‌ ।।
मनुष्य इस प्रकार मन से शुभ तथा अशुभ कर्मों को परलोक में (क्रमशः) इष्ट तथा अनिष्ट (भला बुरा) फल देनेवाला विचारकर मन, वचन तथा कर्म से सर्वदा अच्छे कर्मो को करे।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें