मनुष्य इस प्रकार मन से शुभ तथा अशुभ कर्मों को परलोक में (क्रमशः) इष्ट तथा अनिष्ट (भला बुरा) फल देनेवाला विचारकर मन, वचन तथा कर्म से सर्वदा अच्छे कर्मो को करे।
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