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मनुस्मृति • अध्याय 11 • श्लोक 225
एतैरद्विजातयः शोध्या व्रतैराविष्कृतैनसः । अनाविष्कृतपापांस्तु मन्तरैहोमैश्च शोधयेत्‌ ।।
सर्वविदित पापवाले द्विजातियों को इन पूर्वोक्त (११ । २१०-२२४) प्रायक्षित्तो के द्वारा आगे वक्ष्यमाण परिषद्‌ अर्थात्‌ विद्वत्समिति शुद्धि करे तथा जनता में अविदित पाप वाले द्विजातियों को मन्त्रों के जप तथा हवनों के द्वारा शुद्ध करे।
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