सावित्रीं च जपेन्नित्यं पवित्राणि च शक्तितः ।
सर्वेष्वेव व्रतेष्वेवं प्रायश्षित्तार्थमादृतः ।।
सावित्री तथा पवित्र (अघमर्षण आदि) मन्त्रों का सर्वदा जप करे। इस (११।२२१-२२३) विधि को चान्द्रायण ब्रत के समान अन्य (प्राजापत्य आदि) बरतो में भी यत्नपूर्वक करे।
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