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मनुस्मृति • अध्याय 11 • श्लोक 220
एतद्ुद्रास्तथादित्या वसवश्वाचरन्त्रतम्‌ । सर्वाकुशस्त्रमोक्षाय मरुतश्च महर्षिभिः ।।
इस चान्द्रायण व्रत को रुद्र, सूर्य, वसु, वायु तथा महर्षियों ने सब पापों के नाश के लिए किया था।
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