सावधानचित्त द्विज (नीवारादि) हविष्यात्र के तीन अस्सी अर्थात् दो सौ चालिस ग्रासों की एक मास में जिस किसी प्रकार (कभी १०, कभी ५ तो कभी १४ ग्रास खाकर और कभी उपवास कर एक मास में कुल २४० ग्रास) भोजन कर चन्द्रलोक को प्राप्त करता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।