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मनुस्मृति • अध्याय 11 • श्लोक 218
चतुरः प्रातरश्नीयात्पिण्डान्विप्रः समाहितः । चतुरोऽस्तमिते सूर्ये शिशुचान्द्रायणं स्मृतम्‌ ।।
सावधानचित्त ब्राह्मण (द्विज) चार ग्रास प्रातःकाल तथा चार ग्रास सूर्यास्त होने पर एक मास तक प्रतिदिन भोजन करे तो यह "शिशुचान्द्रायण” ब्रत कहा गया है।
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