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मनुस्मृति • अध्याय 11 • श्लोक 217
अष्टावष्टौ सम श्रीयात्पिण्डान्मध्यंदिने स्थिते । नियतात्मा हविष्याशी यतिचान्द्रायणं चरन्‌ ।।
'यतिचान्द्रायण' ब्रत को करता हुआ संयतेन्द्रिय द्विज (शुक्लपक्ष या कृष्णपक्ष से आरम्भ कर) एक मास तक प्रतिदिन मध्याहृकाल में ८-८ ग्रास हविष्यान्न भोजन करे।
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