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मनुस्मृति • अध्याय 11 • श्लोक 214
यतात्मनोऽ प्रमत्तस्य द्वादशाहमभोजनम्‌ । पराको नाम कृच्छोऽयं सर्वपापापनोदनः ।।
सावधान तथा जितेन्द्रिय होकर बारह दिन तक भोजन नहीं करना चाहिए "पराक” नामक कृच्छुव्रत है, यह व्रत सब प्रकार के (क्षुद्र, मध्यम तथा महान्‌) पापों को नष्ट करनेवाला है।
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