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मनुस्मृति • अध्याय 11 • श्लोक 213
तप्तकृच्छ चरन्विप्रो जलक्षीरघृतानिलान्‌ । प्रतित्र्यहं पिबेदुष्णान्सकृत्स्नायी समाहितः ।।
'तप्तकृच्छु' को करता हुआ ब्राह्मण (द्विज) तीन दिन गर्म जल, तीन दिन गर्म दूध, तीन दिन गर्म घी और अन्त में तीन दिन केवल गर्म वायु को पीकर रहे तथा एक बार प्रतिदिन स्नान करता रहे।
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