(इस कारण से) राजा उस ब्राह्मण के पालन-पोषण करने योग्य (स्त्रीपुत्र आदि) तथा उसके आचरण एवं शील को मालूम कर तदनुसार धर्मयुक्त जीविका को अपने कुटुम्ब से नियत करे।
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