जिनका प्रायश्चित्त नहीं कहा गया है (जैसे प्रतिलोमज का वध करने आदि पर) उनसे उत्पन्न दोष को निवृत्ति के लिए शक्ति (शरीर, धन, सामर्थ्य आदि) और पाप (ज्ञानपूर्वक, आज्ञानपूर्वक इत्यादि कारणों से पापों का गौरव-लाघव आदि) का विचार कर प्रायश्चित्त की कल्पना (धर्मशास्त्रियों को) करनी चाहिए।
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