ब्राह्मण को मारने (पीटने) की इच्छा से डण्डा उठाकर कृच्छ (प्राजापत्य ११।२१.०) व्रत, डण्डे से मारकर अतिकृच्छु (११।२१२) व्रत और मारने से उसका रक्त बहाकर कृच्छर तथा अतिकृच्छु-दोनों = व्रत पापनिवृत्ति के लिए करना चाहिए।
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