मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
मनुस्मृति • अध्याय 11 • श्लोक 207
अवगूर्य चेरेत्कृच्छुमतिकृच्छु निपातने । कृच्छातिकृच्छौ कुर्वीत विप्रस्योत्पाद्य शोणितम्‌ ।।
ब्राह्मण को मारने (पीटने) की इच्छा से डण्डा उठाकर कृच्छ (प्राजापत्य ११।२१.०) व्रत, डण्डे से मारकर अतिकृच्छु (११।२१२) व्रत और मारने से उसका रक्त बहाकर कृच्छर तथा अतिकृच्छु-दोनों = व्रत पापनिवृत्ति के लिए करना चाहिए।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें