मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
मनुस्मृति • अध्याय 11 • श्लोक 206
शोणितं यावतः पांसून्संगृह्णाति महीतले । तावन्त्यब्दसहस््राणि तत्कर्त्ता नरके व्रजेत्‌ ।।
आहत (पीटे गये) ब्राह्मण के शरीर से गिरे हुए रक्त के द्वारा धूलि के जितने कण पिण्ड होते (साने जाते-गीले होते अर्थात्‌ भीगते) हैं, वह रक्त बहाने वाला मनुष्य उतने सहस्र वर्षां तक नरक में निवास करता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें