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मनुस्मृति • अध्याय 11 • श्लोक 205
अवगूर्य त्वब्दशतं सहस्रमभिहत्य च । जिघांसया ब्राह्मणस्य नरकं प्रतिपद्यते ।।
ब्राह्मण को मारने के लिए डण्डा उठाकर सौ वर्ष तक डण्डे से मारकर सहस्र वर्ष तक मनुष्य नरक में वास करता है।
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