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मनुस्मृति • अध्याय 11 • श्लोक 204
ताडयित्वा तृणेनापि कण्ठे वाबध्य वाससा । विवादे वा विनिर्जित्य प्रणिपत्य प्रसादयेत्‌ ।।
ब्राह्मण को तिनके से भी मारकर, उसके गले मे कपड़ा (गमछा आदि, घसीटने-आगे खैचने के लिए) डालकर और विवाद में जीतकर प्रणाम करके उस (ब्राह्मण) को प्रसन्न करना चाहिए।
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