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मनुस्मृति • अध्याय 11 • श्लोक 200
उष्ट्यानं समारुह्ण खरयानं तु कामतः । स्नात्वा तु विप्रो दिग्वासाः प्राणायामेन शुध्यति ।।
ब्राह्मण ऊंटगाड़ी पर इच्छापूर्वक (ज्ञानपूर्वक) चढ़कर, जल में नग्न स्नानकर प्राणायाम करके शुद्ध होता है।
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