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मनुस्मृति • अध्याय 11 • श्लोक 20
न तस्मिन्धारयेहण्डं धार्मिकः पृथिवीपतिः । क्षत्रियस्य हि बालिश्यादब्राह्मणः सीदति क्षुधा ।।
धार्मिक राजा पहले (११।११-१७) आपत्तिकाल में दूसरे के धन को (चोरी या बलात्कार से भी) लेने वाले ब्राह्मण को दण्डित न करे, क्योंकि क्षत्रिय अर्थात्‌ राजा की मूर्खता से ही ब्राह्मण क्षुधापीड़ित होता है। (अत: उसका उक्त प्रकार से धन लाना अपराध नहीं है)।
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