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मनुस्मृति • अध्याय 11 • श्लोक 2
न वै तान्स्नातकान्विद्यादब्राह्मणान्धर्मभिक्षुकान्‌ । निःस्वेभ्यो देयमेतेभ्यो दानं विद्याविशेषतः ।।
इन नव स्नातक ब्राह्मणों को धर्मभिक्षुक जानना चाहिए तथा निर्धन इनके लिए विद्या-विशेष के अनुसार (गौ, सोना, अन्न और वस्त्र आदि) दान देना चाहिए।
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