न वै तान्स्नातकान्विद्यादब्राह्मणान्धर्मभिक्षुकान् ।
निःस्वेभ्यो देयमेतेभ्यो दानं विद्याविशेषतः ।।
इन नव स्नातक ब्राह्मणों को धर्मभिक्षुक जानना चाहिए तथा निर्धन इनके लिए विद्या-विशेष के अनुसार (गौ, सोना, अन्न और वस्त्र आदि) दान देना चाहिए।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।