पङ्किबाह्य (३।१५०-१६६) मनुष्यों (तथा जिनके लिए कोई पृथक् प्रायश्चित्त नहीं किया गया है, उन) की शुद्धि एक मासतक छठे साम (दो दिन दो रात तथा तीसरे दिन पूर्वाह्न में कुछ न खाकर साम) भोजन, वेद-संहिता का जप और 'दैवकृतस्यैनसोऽवयजनमसि’ इत्यादि आठ मन्त्रों से हवन करने से होती है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।