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मनुस्मृति • अध्याय 11 • श्लोक 199
षष्ठान्नकालता मासं संहिताजप एव वा। होमाश्च शाकला नित्यमपाङ्क्यानां विशोधनम्‌ ।।
पङ्किबाह्य (३।१५०-१६६) मनुष्यों (तथा जिनके लिए कोई पृथक्‌ प्रायश्चित्त नहीं किया गया है, उन) की शुद्धि एक मासतक छठे साम (दो दिन दो रात तथा तीसरे दिन पूर्वाह्न में कुछ न खाकर साम) भोजन, वेद-संहिता का जप और 'दैवकृतस्यैनसोऽवयजनमसि’ इत्यादि आठ मन्त्रों से हवन करने से होती है।
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