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मनुस्मृति • अध्याय 11 • श्लोक 193
जपित्वा त्रीणि सावित्र्याः सहस्त्राणि समाहितः । मासं गोष्ठे पयः पीत्वा मुच्यतेऽ सत्प्रतिग्रहात्‌ ।।
ब्राह्मण तीन सहस्र गायत्री जपकर तथा एक मास तक गोशाला से केवल दुग्धाहार कर असत्यप्रतिग्रह (नीच या शूद्र से दान लेने) के दोष से छूट जाता है।
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