प्रायश्चित्तं चिकीर्षन्ति विकर्मस्थास्तु ये द्विजाः ।
ब्रह्मणा च परित्यक्तास्तेषामप्येतदादिशेत् ।।
निषिद्ध (शूद्रसेवा आदि) कार्य करने वाले यज्ञोपवीत संस्कार से युक्त भी वेद को नहीं पढ़े हुए जो द्विज प्रायश्चित्त करना चाहें, उसके लिए भी इसी (तीन प्राजापत्य व्रत ११।२१०) प्रायश्चित्त को करने का उपदेश देना चाहिए।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।