जिन द्विजों का यज्ञोपवीत संस्कार अनुकल्पित समय (ब्राह्मण का १६वें क्षत्रिय का २२वें तथा वैश्य का २४वें वर्ष) में भी नहीं हुआ हो, उनसे तीन कृच्छर (प्राजापत्य ११।११०) व्रत कराकर विधिपूर्वक उसका यज्ञोपवीत संस्कार करना चाहिये।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।