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मनुस्मृति • अध्याय 11 • श्लोक 189
बालघ्नांश्च कृतघ्नांश्च विशुद्धानपि धर्मतः । शरणागतहंतृश्च स्तरीह॑तृश्च न संवसेत्‌ ।।
बाल की हत्या करने वाला, कृतघ्न, शरणागत की हत्या करने वाला और स्त्री की हत्या करने वाला; इसके साथ प्रायश्चित्त द्वारा इसके शुद्ध हो जाने पर भी संसर्ग न करे।
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