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मनुस्मृति • अध्याय 11 • श्लोक 187
एतमेव विधिं कुर्याद्योषित्सु पतितास्वपि । वस्त्रान्नपानं देयं तु वसेयुश्च गृहान्तिके ।।
पतित हुई स्त्रियों के साथ भी यही (१२।१८२-१८७) विधि करें, तथा उसके बान्धव लोग उस (पतित स्त्री) के लिए भोजन वस्त्र और रहने के लिए घर के पास स्थान देवें।
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